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Thursday, January 5, 2012

स्वागत


हिंदी लेंस से देखें और परखें अपनी दुनिया की ख्याति  
उज्वल ज्योति हिंदी, नयी पुरानी बातें है दर्शाती 
प्रसिद्ध या गुमनाम, कहानियाँ जो छु कह जाती 
हो हिंदी की डोर से बाँधी तभी और भी हमको भाँती   
हिंदी  में  जानें कुछ अपनी कुछ औरों की संस्कृति 
नसीहतें जो मिलती हैं,  कुछ  उलझाती  कुछ  सुलझाती 
आए ब्लॉग लेन्स से देखें आखिर हिंदी क्या  रंग  लाती 

हर  अक्षर में  डूबा  हुआ  है ज्ञान  और इतिहास 
कुछ  न्यारी  सी  रीतियों का, नीतियों  का  एहेसास 
रचनाओं में  चुटकुलों  में  मार्मिक  सा  आभास  
मिलजुलकर  हिंदी  पढने  में, बोलने में उल्हास  
अपनी  बोली  का,  औरों  के  मायनों  का  अभ्यास  
हिंदी के ज्ञान पिटारे से ही करना  है  स्वयं  विकास 
अंततः  अपने  विचारों  की अभिव्यक्ति का  प्रयास 



The limits of my language mean the limits of my world      -    Ludwig Wittgenstein